भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 की जानकारी को कहानी के रूप में (Information about Article 3 of the Indian Constitution presented in the form of a story)
मध्य भारत के हरे-भरे जंगलों के बीच बसे छोटे से नगर नवप्रदेश में रहने वाला 14 वर्षीय लड़का कबीर पढ़ाई में जिज्ञासु और प्रश्न पूछने में निडर था। उसे भारत का नक्शा बहुत पसंद था, लेकिन उसे एक बात हमेशा उलझन में डालती थी—राज्यों की सीमाएँ बदलती कैसे हैं? एक दिन विद्यालय में उसकी शिक्षिका ने एक रोचक कार्य दिया—
“भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 को कहानी के रूप में समझाओ।”
कबीर ने किताब खोली, पर भाषा कठिन लगी। वह शाम को पास की पहाड़ी पर जा बैठा, जहाँ से पूरा नगर और दूर-दूर तक फैले राज्य की सीमा दिखाई देती थी। हवा में हल्की ठंडक थी और सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था। तभी अचानक धरती पर हलचल हुई और उसके सामने एक तेजस्वी पुरुष प्रकट हुआ। उसके हाथ में चमकती हुई तलवार नहीं, बल्कि एक प्रकाशमान संविधान ग्रंथ था।
वह गंभीर स्वर में बोला,
“डरो मत बालक, मैं हूँ सीमा-निर्माता (Boundary Maker)। आज मैं तुम्हें अनुच्छेद 3 की कहानी सुनाने आया हूँ।”
कबीर चौंक गया, पर उत्सुकता से बोला,
“सीमा-निर्माता जी, अनुच्छेद 3 क्या बताता है?”
सीमा-निर्माता ने ग्रंथ खोला। हवा में भारत का नक्शा उभर आया।
“अनुच्छेद 3,” उसने कहा, “भारत को यह शक्ति देता है कि वह नए राज्य बना सके, राज्यों की सीमाएँ बदल सके, राज्यों का नाम बदल सके या दो राज्यों को मिलाकर एक नया राज्य बना सके।”
कबीर ने आश्चर्य से पूछा,
“क्या यह सब आसानी से किया जा सकता है?”
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 2 के बारे में जानकारी एक कहानी के रूप में प्रस्तुत की गई है। (Information about Article 2 of the Indian Constitution presented in the form of a story)
सीमा-निर्माता मुस्कुराया।
“नहीं, यह प्रक्रिया संवैधानिक है। कोई भी बदलाव संसद द्वारा कानून बनाकर किया जाता है। हालाँकि जिस राज्य पर प्रभाव पड़ता है, उसकी विधानसभा से राय ली जाती है, लेकिन अंतिम निर्णय संसद का होता है।”
उसने हाथ घुमाया तो दृश्य बदल गया। कबीर ने देखा—एक बड़ा राज्य दो हिस्सों में बँट गया, कहीं दो राज्य मिल गए, कहीं नाम बदला गया।
“देखो,” सीमा-निर्माता बोला, “समय, प्रशासनिक सुविधा, भाषा, संस्कृति और जनता की आवश्यकता के अनुसार भारत ने अपने राज्यों का पुनर्गठन किया है। अनुच्छेद 3 ने भारत को लचीला और उत्तरदायी राष्ट्र बनाया।”
कबीर ने कहा,
“तो क्या इससे भारत कमजोर नहीं होता?”
सीमा-निर्माता ने गंभीरता से उत्तर दिया,
“नहीं। इससे भारत मजबूत होता है। जब जनता की भावनाओं और प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार परिवर्तन किए जाते हैं, तो एकता और विश्वास बढ़ता है। अनुच्छेद 3 भारत की संघीय व्यवस्था को जीवंत बनाए रखता है।”
सूरज अब क्षितिज में समा रहा था। सीमा-निर्माता की आभा भी धीरे-धीरे मंद पड़ने लगी। उसने कहा,
“याद रखना कबीर, अनुच्छेद 3 केवल सीमाएँ बदलने का अधिकार नहीं, बल्कि लोकतंत्र, संतुलन और प्रशासनिक सुधार का माध्यम है।”
कहते ही वह प्रकाश में विलीन हो गया।
कबीर घर लौटा, अपनी कॉपी खोली और पूरी कहानी लिख डाली। अगले दिन जब उसने कक्षा में कहानी सुनाई, शिक्षिका ने गर्व से कहा,
“कबीर, तुमने अनुच्छेद 3 को केवल समझा नहीं, उसकी भावना को शब्दों में ढाल दिया।”
कबीर मुस्कुराया। अब वह जान चुका था कि भारत की शक्ति उसकी बदलती सीमाओं में नहीं, बल्कि उसकी एकता और संविधान की समझ में है।

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