Information about Article 4 of the Indian Constitution presented in the form of a story

 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 4 की जानकारी को कहानी के रूप में 

Information about Article 4 of the Indian Constitution presented in the form of a story

Information about Article 4 of the Indian Constitution presented in the form of a story


पूर्वी भारत के शांत और हरियाली से भरे नगर संविधानपुर में रहने वाली 15 वर्षीय लड़की मीरा को पढ़ना-लिखना बहुत पसंद था। उसे खासतौर पर भारत का संविधान आकर्षित करता था, लेकिन कुछ अनुच्छेद उसे कठिन लगते थे। एक दिन विद्यालय में सामाजिक विज्ञान की अध्यापिका ने विद्यार्थियों को एक नया कार्य दिया—
“भारतीय संविधान के अनुच्छेद 4 को कहानी के रूप में समझाओ।”

मीरा ने किताब खोली, पर अनुच्छेद 4 की भाषा उसे जटिल लगी। वह शाम को पास की झील के किनारे बैठ गई, जहाँ शांत जल में पेड़ों की परछाइयाँ झिलमिला रही थीं। तभी हल्की रोशनी फैलने लगी और उसके सामने एक शांत, गरिमामय व्यक्तित्व प्रकट हुआ। उसके हाथ में एक चमकता हुआ संविधान और चेहरे पर गहरी समझ की झलक थी।

वह बोला,
“घबराओ मत मीरा, मैं हूँ संविधान संरक्षक (Constitution Keeper)। आज मैं तुम्हें अनुच्छेद 4 की कहानी सुनाने आया हूँ।”

मीरा ने उत्सुकता से पूछा,
“संरक्षक जी, अनुच्छेद 4 क्या बताता है?”

संविधान संरक्षक ने ग्रंथ खोला। हवा में भारत का नक्शा उभर आया, जिसमें कुछ सीमाएँ बदलती दिखाई दीं।
“अनुच्छेद 4,” उसने कहा, “यह स्पष्ट करता है कि जब संसद अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 के अंतर्गत नए राज्य बनाए, सीमाएँ बदले या राज्यों का पुनर्गठन करे, तो उससे संबंधित संविधान में आवश्यक संशोधन उसी कानून के माध्यम से किए जा सकते हैं।”

मीरा ने आश्चर्य से पूछा,
“तो क्या हर बार संविधान संशोधन की अलग प्रक्रिया नहीं अपनानी पड़ती?”

संरक्षक मुस्कुराया।
“नहीं। यही अनुच्छेद 4 की विशेषता है। यह कहता है कि ऐसे संशोधन अनुच्छेद 368 के अंतर्गत औपचारिक संविधान संशोधन नहीं माने जाएंगे। इससे प्रक्रिया सरल और व्यावहारिक बनती है।”

उसने हाथ उठाया और दृश्य बदल गया। मीरा ने देखा—एक राज्य दो भागों में बँटा, कहीं नए नाम जुड़े, और साथ-साथ संविधान की अनुसूचियाँ स्वतः संशोधित हो गईं।
“देखो,” संरक्षक बोला, “अनुच्छेद 4 यह सुनिश्चित करता है कि राज्यों के पुनर्गठन के साथ संविधान भी सहज रूप से अनुकूलित हो जाए।”

मीरा ने कहा,
“इससे तो प्रशासन आसान हो जाता होगा।”

“बिल्कुल,” संरक्षक ने उत्तर दिया।
“यदि हर छोटे बदलाव के लिए कठोर संशोधन प्रक्रिया अपनानी पड़े, तो शासन जटिल हो जाएगा। अनुच्छेद 4 ने भारत को लचीलापन और प्रशासनिक दक्षता प्रदान की है।”


झील का पानी अब सुनहरी रोशनी से चमक रहा था। संरक्षक ने गंभीर स्वर में कहा,
“अनुच्छेद 4 दिखाता है कि संविधान कोई कठोर दस्तावेज नहीं, बल्कि एक जीवंत और व्यावहारिक मार्गदर्शक है, जो देश की जरूरतों के अनुसार स्वयं को ढाल सकता है।”

धीरे-धीरे उसकी आकृति प्रकाश में विलीन होने लगी। जाते-जाते उसने कहा,
“मीरा, इसे कहानी में लिखो और दूसरों को बताओ कि संविधान कैसे परिवर्तन के साथ भी स्थिरता बनाए रखता है।”

मीरा घर लौटी, अपनी कॉपी खोली और पूरी कहानी लिख डाली। अगले दिन जब उसने कक्षा में सुनाया, अध्यापिका ने प्रसन्न होकर कहा,
“तुमने अनुच्छेद 4 को केवल समझा नहीं, उसकी भावना को जीवंत कर दिया।”

मीरा मुस्कुराई। अब वह जान चुकी थी कि अनुच्छेद 4 संविधान की वह कड़ी है जो परिवर्तन और स्थिरता के बीच संतुलन बनाकर भारत को आगे बढ़ाती है।

Post a Comment

0 Comments