परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा | Major Somnath Sharma First Param Vir Chakra

परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा  | Major Somnath Sharma First Param Vir Chakra


भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता
India’s First PVC Awardee

मेजर सोमनाथ शर्मा की वीरगाथा

🔹 1. भूमिका (Introduction)

भारत के सैन्य इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक बन गए हैं। मेजर सोमनाथ शर्मा ऐसे ही एक महान योद्धा थे, जिन्हें भारत का पहला परमवीर चक्र प्रदान किया गया। उनका जीवन और बलिदान भारतीय सेना के शौर्य की अमर कहानी है, जो आज भी हर भारतीय को गर्व से भर देता है।

🔹 2. जन्म और प्रारंभिक जीवन

मेजर सोमनाथ शर्मा का जन्म 31 जनवरी 1923 में तत्कालीन पंजाब प्रांत (वर्तमान हिमाचल प्रदेश) के कांगड़ा जिले में हुआ था। वे एक सैन्य परिवार से थे, जिससे देशसेवा की भावना उन्हें विरासत में मिली। बचपन से ही उनमें अनुशासन, साहस और नेतृत्व के गुण दिखाई देने लगे थे।

🔹 3. सैन्य प्रशिक्षण और कमीशन

सन 1942 में उन्हें 1/8 गोरखा राइफल्स (बाद में कुमाऊँ रेजिमेंट की 4वीं बटालियन) में कमीशन प्राप्त हुआ। प्रशिक्षण के दौरान वे एक अनुशासित, साहसी और प्रेरणादायक अधिकारी के रूप में पहचाने जाने लगे। उनके नेतृत्व कौशल ने उन्हें अपने सैनिकों में अत्यंत लोकप्रिय बना दिया।

🔹 4. भारत-पाक युद्ध 1947 और कश्मीर मोर्चा

3 नवंबर 1947 को, भारत-पाकिस्तान के प्रथम युद्ध के दौरान, मेजर सोमनाथ शर्मा की कंपनी को कश्मीर घाटी के बड़गाम क्षेत्र में तैनात किया गया। उनका कार्य था – पाकिस्तानी कबाइलियों को आगे बढ़ने से रोकना। उस समय उनकी टुकड़ी संख्या में कम थी, लेकिन दुश्मन कई गुना अधिक था।

🔹 5. अद्भुत वीरता और सर्वोच्च बलिदान

युद्ध के दौरान मेजर सोमनाथ शर्मा स्वयं घायल होने के बावजूद मोर्चे पर डटे रहे। उन्होंने अपने सैनिकों को प्रेरित करते हुए कहा कि “एक इंच भी पीछे नहीं हटना है।”
वे लगातार दुश्मन पर ग्रेनेड फेंकते रहे और अपनी कंपनी का नेतृत्व करते रहे। इसी दौरान एक मोर्टार विस्फोट में वे वीरगति को प्राप्त हो गए। कहा जाता है कि उनके शरीर पर 500 से अधिक छर्रों के घाव पाए गए।

🔹 6. परमवीर चक्र सम्मान

उनकी असाधारण वीरता, नेतृत्व और सर्वोच्च बलिदान के लिए 1950 में मरणोपरांत उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। वे भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता बने और भारतीय सैन्य इतिहास में अमर हो गए।

🔹 7. राष्ट्र के लिए प्रेरणा

मेजर सोमनाथ शर्मा का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कर्म और बलिदान में होती है। उनका साहस आज भी भारतीय सेना और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

🔹 8. निष्कर्ष (Conclusion)

मेजर सोमनाथ शर्मा केवल एक सैनिक नहीं थे, बल्कि वे भारत की आत्मा के रक्षक थे। उनका नाम भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उनका बलिदान हमें यह याद दिलाता है कि हमारी स्वतंत्रता और सुरक्षा ऐसे ही वीरों के कारण सुरक्षित है।

📘 संबंधित 10 MCQ प्रश्न

Q1. मेजर सोमनाथ शर्मा को कौन-सा सर्वोच्च सैन्य सम्मान मिला?
A) अशोक चक्र
B) महावीर चक्र
C) परमवीर चक्र ✅
D) वीर चक्र

Q2. वे भारत के कौन-से परमवीर चक्र विजेता थे?
A) दूसरे
B) तीसरे
C) पहले ✅
D) अंतिम

Q3. मेजर सोमनाथ शर्मा का जन्म किस वर्ष हुआ था?
A) 1920
B) 1923 ✅
C) 1925
D) 1930

Q4. वे किस रेजिमेंट से संबंधित थे?
A) सिख रेजिमेंट
B) गोरखा / कुमाऊँ रेजिमेंट ✅
C) राजपूताना राइफल्स
D) मद्रास रेजिमेंट

Q5. उनकी वीरगति किस युद्ध में हुई?
A) 1962 युद्ध
B) 1965 युद्ध
C) 1971 युद्ध
D) 1947 भारत-पाक युद्ध ✅

Q6. बड़गाम क्षेत्र किस राज्य/केंद्रशासित प्रदेश में है?
A) पंजाब
B) हिमाचल प्रदेश
C) जम्मू-कश्मीर ✅
D) उत्तराखंड

Q7. उनकी मृत्यु किस तिथि को हुई?
A) 26 जनवरी 1950
B) 15 अगस्त 1947
C) 3 नवंबर 1947 ✅
D) 30 जनवरी 1948

Q8. मेजर सोमनाथ शर्मा को परमवीर चक्र कब प्रदान किया गया?
A) 1947
B) 1948
C) 1950 ✅
D) 1952

Q9. उनकी वीरता का मुख्य कारण क्या था?
A) रणनीति
B) नेतृत्व
C) सर्वोच्च बलिदान
D) उपरोक्त सभी ✅

Q10. मेजर सोमनाथ शर्मा किसके प्रतीक हैं?
A) डर
B) स्वार्थ
C) साहस और देशभक्ति ✅
D) राजनीति

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