कहानी के रूप में लेख: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 9
स्वतंत्र भारत के शुरुआती वर्षों की बात है। उत्तर भारत के एक सीमावर्ती कस्बे नवचेतनपुर में 18 वर्षीय छात्र समीर रहता था। वह इतिहास और राजनीति में गहरी रुचि रखता था। एक दिन कॉलेज में उसके प्राध्यापक ने प्रश्न रखा—
“अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे देश की नागरिकता स्वीकार कर ले, तो भारत के संविधान में उसका क्या स्थान रह जाता है?”
यही प्रश्न अनुच्छेद 9 की जड़ है।
समीर यह सवाल लेकर अपने नाना जी के पास पहुँचा, जिन्होंने विभाजन और संविधान लागू होने का समय अपनी आँखों से देखा था। नाना जी ने गंभीर स्वर में कहा,
“बेटा, यही तो अनुच्छेद 9 की कहानी है—निष्ठा और नागरिकता की।”
1. अनुच्छेद 9 का मूल विषय
नाना जी ने समझाया कि अनुच्छेद 9 यह स्पष्ट करता है कि यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता स्वीकार कर लेता है, तो वह भारत का नागरिक नहीं रह जाता। यह प्रावधान संविधान के लागू होने के समय (26 जनवरी 1950) के संदर्भ में बनाया गया था।
समीर ने पूछा,
“तो क्या यह दोहरी नागरिकता को रोकता है?”
नाना जी मुस्कुराए—
“बिल्कुल। भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है, और अनुच्छेद 9 इसी सिद्धांत को मजबूत करता है।”
2. ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
विभाजन के बाद कई लोग असमंजस में थे—कुछ ने पाकिस्तान या अन्य देशों की नागरिकता ले ली। संविधान निर्माताओं को यह तय करना था कि ऐसे लोग भारत के नागरिक माने जाएँ या नहीं। इसी संदर्भ में अनुच्छेद 9 जोड़ा गया, ताकि नागरिकता का दुरुपयोग न हो और राष्ट्र के प्रति निष्ठा स्पष्ट रहे।
3. अनुच्छेद 9 की शर्तें
नाना जी ने आगे बताया—
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यदि किसी व्यक्ति ने विदेशी नागरिकता स्वेच्छा से ले ली है
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और यह संविधान के लागू होने से पहले हो चुका है
तो वह व्यक्ति भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा।
यह नियम सख्त लग सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और स्पष्ट पहचान सुनिश्चित करना था।
4. अनुच्छेद 9 और अन्य नागरिकता अनुच्छेद
समीर ने जाना कि अनुच्छेद 9, अनुच्छेद 5, 6 और 8 के साथ जुड़ा हुआ है।
जहाँ अनुच्छेद 5–8 नागरिकता प्रदान करने की शर्तें बताते हैं, वहीं अनुच्छेद 9 नागरिकता के समाप्त होने की स्थिति को स्पष्ट करता है।
5. वर्तमान समय में अनुच्छेद 9 का महत्व
हालाँकि आज नागरिकता से जुड़े मामले मुख्य रूप से नागरिकता अधिनियम, 1955 से नियंत्रित होते हैं, फिर भी अनुच्छेद 9 संविधान की उस भावना को दर्शाता है जिसमें एक राष्ट्र–एक नागरिकता का सिद्धांत निहित है।
समीर ने महसूस किया कि संविधान केवल अधिकारों की सूची नहीं, बल्कि कर्तव्यों और निष्ठा की भी कहानी है।
6. कहानी का निष्कर्ष
उस शाम समीर ने अपनी डायरी में लिखा—
“अनुच्छेद 9 हमें सिखाता है कि नागरिकता केवल पहचान नहीं, बल्कि देश के प्रति प्रतिबद्धता है।”
अगले दिन जब उसने कक्षा में अपनी कहानी प्रस्तुत की, प्राध्यापक ने कहा—
“तुमने अनुच्छेद 9 को सरल, स्पष्ट और जीवंत बना दिया।”
समीर मुस्कुराया। अब वह समझ चुका था कि भारतीय संविधान नागरिकता को एक गंभीर और जिम्मेदार संबंध के रूप में देखता है।
अनुच्छेद 9 उसी जिम्मेदारी की संवैधानिक अभिव्यक्ति है।
Related 10 MCQ Questions (Article 9)
1. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 9 किससे संबंधित है?
A) नागरिकता प्राप्त करना
B) दोहरी नागरिकता
C) नागरिकता समाप्त होना
D) विदेशी नीति
✅ Answer: C
2. अनुच्छेद 9 किस भाग में है?
A) भाग I
B) भाग II
C) भाग III
D) भाग IV
✅ Answer: B
3. अनुच्छेद 9 का मुख्य सिद्धांत क्या है?
A) उदारता
B) दोहरी नागरिकता
C) एक राष्ट्र–एक नागरिकता
D) अस्थायी नागरिकता
✅ Answer: C
4. अनुच्छेद 9 कब लागू होता है?
A) वर्तमान में
B) भविष्य में
C) संविधान के प्रारंभ के समय
D) आपातकाल में
✅ Answer: C
5. यदि कोई व्यक्ति विदेशी नागरिकता स्वीकार कर ले, तो क्या होगा?
A) मतदान अधिकार मिलेगा
B) भारतीय नागरिक रहेगा
C) भारतीय नागरिकता समाप्त हो जाएगी
D) अस्थायी नागरिक बनेगा
✅ Answer: C
6. भारत में दोहरी नागरिकता की स्थिति क्या है?
A) अनुमति है
B) आंशिक अनुमति
C) अनुमति नहीं है
D) केवल प्रवासियों को
✅ Answer: C
7. अनुच्छेद 9 किन अनुच्छेदों से जुड़ा है?
A) 12–35
B) 36–51
C) 5–8
D) 14–18
✅ Answer: C
8. अनुच्छेद 9 का उद्देश्य क्या है?
A) अधिकार बढ़ाना
B) निष्ठा सुनिश्चित करना
C) कर व्यवस्था
D) चुनाव सुधार
✅ Answer: B
9. नागरिकता अधिनियम कब बना?
A) 1950
B) 1952
C) 1955
D) 1962
✅ Answer: C
10. अनुच्छेद 9 किस भावना को दर्शाता है?
A) लचीलापन
B) करुणा
C) राष्ट्रीय निष्ठा और स्पष्टता
D) विकेंद्रीकरण
✅ Answer: C
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