🟦 प्रस्तावना (Introduction)
“समन्वय समस्त संगठित प्रयासों का प्रारम्भ और अन्त है” यह कथन प्रशासन एवं प्रबंधन के क्षेत्र में अत्यंत प्रसिद्ध है, जिसे प्रबंधन विद्वान मैरी पार्कर फॉलेट (Mary Parker Follett) ने प्रतिपादित किया था। यह कथन इस तथ्य को रेखांकित करता है कि किसी भी संगठन की सफलता का आधार समन्वय है। बिना समन्वय के संगठन के विभिन्न विभाग, अधिकारी और कर्मचारी अपने-अपने लक्ष्य में उलझकर संगठनात्मक उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सकते।
🟦 समन्वय का अर्थ (Meaning of Coordination)
समन्वय का तात्पर्य संगठन के विभिन्न कार्यों, प्रयासों और संसाधनों में सामंजस्य स्थापित करना है, ताकि सभी इकाइयाँ एक साझा उद्देश्य की ओर मिलकर कार्य करें। यह सुनिश्चित करता है कि संगठन में दोहराव, संघर्ष और भ्रम की स्थिति न उत्पन्न हो।
🟦 समन्वय को प्रारम्भ क्यों कहा गया है?
किसी भी संगठित प्रयास की शुरुआत योजना से होती है और योजना तभी प्रभावी होती है जब विभिन्न विभागों के बीच समन्वय हो। लक्ष्य निर्धारण, कार्य विभाजन और संसाधनों का आवंटन—ये सभी कार्य समन्वय पर आधारित होते हैं। यदि प्रारम्भ से ही समन्वय न हो तो संगठन की नींव कमजोर हो जाती है।
🟦 समन्वय को अन्त क्यों कहा गया है?
संगठन का अंतिम उद्देश्य लक्ष्यों की प्राप्ति होता है। यह तभी संभव है जब कार्यों के क्रियान्वयन, निर्देशन और नियंत्रण के सभी चरणों में निरंतर समन्वय बना रहे। कार्य पूर्ण होने के बाद परिणामों का मूल्यांकन भी समन्वय के माध्यम से ही किया जाता है। इसीलिए कहा जाता है कि समन्वय संगठनात्मक प्रयासों का अन्त भी है।
🟦 प्रशासन एवं प्रबंधन में समन्वय का महत्व
प्रशासन में विभिन्न विभागों—जैसे वित्त, कार्मिक, योजना और क्रियान्वयन—के बीच समन्वय आवश्यक है। प्रबंधन में यह योजना, संगठन, निर्देशन और नियंत्रण जैसे सभी कार्यों को जोड़ने का काम करता है। समन्वय संगठन को एकजुट रखता है और लक्ष्य प्राप्ति को सरल बनाता है।
🟦 क्या आप इस कथन से सहमत हैं? (Critical View)
हाँ, हम इस कथन से पूर्णतः सहमत हैं क्योंकि समन्वय के बिना संगठन केवल संरचना मात्र बनकर रह जाता है। यद्यपि कुछ विद्वान मानते हैं कि समन्वय स्वयं एक स्वतंत्र कार्य नहीं बल्कि अन्य कार्यों का परिणाम है, फिर भी व्यवहारिक दृष्टि से समन्वय हर चरण में अनिवार्य है।
🟦 निष्कर्ष (Conclusion)
निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि समन्वय संगठनात्मक जीवन की आत्मा है। यह न केवल कार्यों की शुरुआत को दिशा देता है, बल्कि उन्हें सफलतापूर्वक पूर्ण करने में भी सहायता करता है। इसलिए “समन्वय समस्त संगठित प्रयासों का प्रारम्भ और अन्त है” कथन पूर्णतः सार्थक और व्यवहारिक है।

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