भारत की पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ एवं उनका प्रभाव
Important East-Flowing Rivers of India Explained
भारत की पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ: जैविक, भौगोलिक और आर्थिक महत्व
भारत की भौगोलिक संरचना बहुत विविध और सहज रूप से विभाजित है। यहाँ नदियाँ अपने प्रवाह के आधार पर पूर्व की ओर और पश्चिम की ओर बहने वाली दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित होती हैं। पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ वे हैं जो पहाड़ों या पठारों से उत्पन्न होकर पूर्व दिशा में बहकर अंततः बंगाल की खाड़ी और इसके आसपास के समुद्र तक पहुँचती हैं। भारत की प्रमुख नदियों में से अधिकांश पूर्व की ओर बहती हैं और इन्हें उपजाऊ मैदानों, सिंचाई व्यवस्था, संस्कृति, सभ्यता और सामाजिक-आर्थिक जीवन का आधार माना जाता है।
भारत की प्रमुख पूर्व की ओर बहने वाली नदियों में शामिल हैं: गंगा, ब्रह्मपुत्र, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी, महानदी, नर्मदा-तथा, सुन도र्बन निकट प्रवाह समाहित (कुछ विशेषज्ञों के दृष्टिकोण पर आधारित वर्गीकरण अलग भी हो सकता है)। इनमें से कुछ नदी प्रणालियाँ हिमालय से निकलती हैं तो कुछ डेक्कन की पठारी भूमि से।
गंगा नदी भारत की सबसे बड़ी और पवित्र नदी है। यह हिमालय की गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है और उत्तर-पूर्व दिशा में बहकर कुछ हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम भी जाती है, परंतु अंतिम लक्ष्य बंगाल की खाड़ी है। गंगा और उसकी सहायक नदियाँ (यमुना, गोमती, रामगंगा) मिलकर विशाल गंगा जलसमावेश बनाती हैं, जो भारत-बांग्लादेश के मैदानी इलाकों को उपजाऊ मृदा देती है। गंगा की घाटी भारत की कृषि, परिवहन और जीवन-सम्पूर्ण संस्कृति की आधारशिला है।
ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत के मानसरोवर झील के निकट सुगंदित हिमालय से निकलती है, फिर भारत के पूर्वोत्तर भाग से होकर बांग्लादेश के साथ मिलती है और बृहद् डेल्टा का निर्माण कर बंगाल की खाड़ी में मिलती है। ब्रह्मपुत्र का प्रवाह तेज, जल-समृद्ध और बाढ़-प्रवण होता है, परन्तु यह असम और बांग्लादेश के लिए जल, जैव विविधता और मत्स्य जीवन का स्रोत है।
दक्षिण भारत की प्रमुख पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ हैं गोदावरी, कृष्णा और कावेरी।
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गोदावरी महाराष्ट्र के सत्रघना पठार से निकलकर तटीय क्षेत्र में प्रवेश करती है और बंगाल की खाड़ी में मिलती है।
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कृष्णा महाराष्ट्र-कर्नाटक-आंध्र प्रदेश से बहकर तटीय मैदानों को सींचती है और अंततः समुद्र में विलीन होती है।
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कावेरी पश्चिमी घाट से निकलकर तमिलनाडु-कर्नाटक के बीच बहती है और मुथुराजराजपुरम के निकट बंगाल की खाड़ी से सटा समुद्र में मिलता है। ये नदियाँ दक्षिण भारत के कृषि-आधारित समाज की जीवनरेखा हैं, जहाँ चावल, तिलहन, मिलेट आदि की उत्पादन क्षमता होती है।
भारत में पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ जल संचयन (reservoirs), सिंचाई परियोजनाएँ, विद्युत उत्पादन (हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स), पर्यटन एवं जल-जीव विविधता संरक्षण के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं। इनके विस्तृत मैदानी तटों पर बसे प्राचीन शहरों और सभ्यताओं — जैसे वाराणसी, प्रयाग, पटना, कोलकाता — ने सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सम्बद्धता विकसित की है।
इन नदियों का प्रवाह बंगाल की खाड़ी में मिलकर विशाल डेल्टा बनाता है, जो विश्व के सबसे बड़े और जैविक दृष्टि से समृद्ध डेल्टा क्षेत्रों में से एक है। यहाँ की भूमि अत्यंत उपजाऊ होने के कारण कृषि को बल मिलता है और जन-जीवन स्थिरता प्राप्त करता है। इसलिए कहा जा सकता है कि भारत की पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ न केवल भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि यह देश की सभ्यता, अर्थव्यवस्था एवं संस्कृति की आधारशिला भी हैं।

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