लोक प्रशासन
PUBLIC ADMINISTRATION
प्रशासन का अर्थ Meaning of Administration
सार्वजनिक कार्यों के सम्पादन से सम्बन्धित
प्रशासन को लोक प्रशासन कहा जाता है। इसका सामान्य अर्थ जनहित के उद्देश्य से
संचालित गतिविधियों है। पारम्परिक रूप में ये गतिविधियाँ सरकारी गतिविधियों तक ही
सीमित थीं और तदनुरूप लोक प्रशासन का अर्थ भी मात्र सरकारी प्रशासन से लिया जाता था।
लेकिन वर्ष 1980 के बाद नव-लोक
प्रशासन के प्रभाव एवं भूमण्डलीकरण की प्रवृत्ति के सन्दर्भ में लोक प्रशासन की
भूमिका अपने कार्यों के सन्दर्भ में बदलने लगी तद्नुरूप उसका अर्थ भी नीतिविज्ञान
एवं आर्थिक प्रभाव से प्रेरित नव-लोक प्रबन्ध हो गया। लोक प्रशासन के अर्थ को
समझने से पहले हमें प्रशासन के अर्थ को समझना आवश्यक है। प्रशासन एक निश्चित
उद्देश्यो की पूर्ति के लिए मनुष्यों का आपस में सहयोग है।
एलपीजी नीतियों से बदला सरकार का स्वरूप LPG Reforms Changed Nature Of Government Role
"प्रशासन उद्देश्य प्राप्ति के लिए
स्थापित संगठन एवं मनुष्य तथा वस्तुओं का प्रयोग है। यह उन प्रबन्धनों का
विशेषीकृत व्यवसाय है, जिनके पास व्यक्तियों और भौतिक संसाधनों को संगठित व निर्देशित करने का
उसी प्रकार का एक कौशल होता है। "
लोक प्रशासन का अर्थ (Meaning of Public Administration)
लोक प्रशासन आंग्ल भाषा के दो शब्दों 'Public' और 'Administration' का पर्यायवाची है। यह
दो शब्दों 'लोक' और 'प्रशासन' से मिलकर बना है। 'लोक' शब्द 'सार्वजनिकता' का सूचक है तथा यह आम आदमी के लिए प्रशासन का मार्ग प्रशस्त करता है। 'लोक' (Public) शब्द का प्रयोग 'सरकारी संस्था' या 'गवर्नमेन्ट' के प्रशासनिक कार्यों को परिलक्षित करता है। इसे जनप्रशासन, सार्वजनिक प्रशासन या सरकारी प्रशासन भी कहा जाता है। लोक शब्द का प्रयोग इस विषय को सरकार के प्रशासनिक
क्रियाकलापों तक सीमित कर देता है, क्योंकि राज्य ही
एकमात्र ऐसा संगठन है जिसमें देश के अन्दर रहने वाले समस्त व्यक्ति आ जाते हैं।
अतः लोक प्रशासन से अर्थ मानवीय एवं भौतिक स्रोतों के शासन द्वारा निर्धारित
उद्देश्यों की पूर्ति के लिये एक संगठन से है। लोक या जन शब्द सार्वजनिकता का सूचक
है तथा यह आम नागरिक के लिये प्रशासन का द्वार खोलता है। अर्थात् जो प्रशासन आम
लोगों के लिये हो, वह लोक प्रशासन है। प्रशासन
व्यक्तिगत और सार्वजनिक हो सकता है लेकिन लोक प्रशासन कभी भी व्यक्तिगत नहीं हो
सकता है। सरकार द्वारा सम्पन्न क्रियाएँ व्यापक, सार्वजनिक
और लोक-हित की होती हैं इसलिये सरकारी कार्यों के प्रशासन को लोक प्रशासन कहा जाता
है।
सरकार के तीन अंग होते हैं: विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका । क्या लोक
प्रशासन में सरकार के तीनों अंगों का अध्ययन किया जाना चाहिए ? इस प्रश्न पर विचारकों में मतभेद है। इस मतभेद के कारण विद्वानों ने लोक
प्रशासन की विस्तृत एवं संकुचित परिभाषाएँ की हैं। ह्वाइट, वुडरो विल्सन, फिफ्नर, डिमॉक आदि लोक प्रशासन को विस्तृत अर्थ में स्वीकार करते हैं। गुलिक, साइमन, विलोबी, फेयोल आदि इसके संकुचित मत को मानते हैं।
थॉमस एक्विनास पवित्र कानून पर जोर | Thomas Aquinas Divine Law Emphasis
लोक प्रशासन की परिभाषाएँ (Definitions of Public Administration)
एल. डी. ह्वाइट के
शब्दों में, “लोक प्रशासन में वे सभी कार्य आ जाते
हैं जिनका उद्देश्य सार्वजनिक नीतियों को पूरा करना या लागू करना होता है। "
वुडरो विल्सन के
अनुसार, "कानून को विस्तृत एवं क्रमबद्ध रूप से
क्रियान्वित करने का नाम ही लोग प्रशासन है। कानून को क्रियान्वित करने की
प्रत्येक क्रिया एक प्रशासकीय क्रिया है।'
फिफ्नर के अनुसार, “लोक
प्रशासन का अर्थ जनता का सहयोग प्राप्त करके सरकार के कार्यों का संचालन करना है। चाहे वह स्वास्थ्य प्रयोगशाला में एक्स-रे मशीन का संचालन हो या
टकसाल में सिक्के ढालना हो।"
- हर्बर्ट साइमन के शब्दों में, “साधारण प्रयोग में लोक प्रशासन का अर्थ राष्ट्रीय, प्रान्तीय तथा स्थानीय हैंसरकारों की कार्यपालिका शाखाओं की क्रिया से है।
- लूथर गुलिक के अनुसार, “सामान्यतः लोक प्रशासन, प्रशासन विज्ञान का वह भाग है जो शासन से प्र विशेषकर इसके कार्यपालिका पक्ष से सम्बन्धित है जहाँ सरकार का कार्य किया जाता है, यद्यपि विधायिका न्यायपालिका से सम्बन्धित समस्याएँ भी स्पष्ट रूप से प्रशासकीय समस्याएँ ही हैं।'
- विलोबी का मत है कि, “अपने व्यापक अर्थ में लोक प्रशासन उस कार्य का प्रतीक है जो सरकारी कार्यो प के वास्तविक सम्पादन से सम्बद्ध होता है, चाहे वे कार्य सरकार की किसी शाखा से सम्बन्धित क्यों न हों। अपने संकुचित अर्थ में, वह केवल प्रशासकीय शाखा की कार्यवाहियों की ओर संकेत करता है।”
- पॉल एच. एपलबी की दृष्टि में, “नीति-निर्माण ही लोक प्रशासन का सार है।”
- पर्सी मकक्वीन के शब्दों में, “लोक प्रशासन वह प्रशासन है जिसका सम्बन्ध सरकार के कार्यों से है, चाहे वह केन्द्रीय सरकार द्वारा सम्पादित हों या स्थानीय सरकार के द्वारा।"
- नीग्रो के अनुसार, “लोक प्रशासन का सम्बन्ध सरकार की तीनों शाखाओं-विधायी, न्याय सम्बन्धी और कार्यकारी तथा इनकी पारस्परिक सम्बद्धता के साथ है।
- ई. एन. ग्लेडन के शब्दों में, “लोक प्रशासन अनेक रूपी है, इसकी परिभाषा करना अत्यन्त कठिन है। सरकार के बदलते हुए कार्यों के सन्दर्भ में ही इसे समझा जा सकता है।
उपर्युक्त परिभाषाओं का विश्लेषण करने पर विदित
होता है कि विद्वानों के मतभेद दो महत्वपूर्ण बातों पर केन्द्रित हैं
(अ) क्या प्रशासन किसी ध्येय
से सम्बन्धित समूची क्रियाओं के समूह को कहते हैं या प्रबन्ध की विशेष क्रिया को
जो ध्येय से स्वतन्त्र प्रयास करे सभी क्षेत्रों में दृष्टिगोचर होती है।
(ब) क्या लोक प्रशासन सरकार की
एकीकृत कार्यविधियों का समानार्थक है या केवल कार्यपालिका अंग तक ही सीमित है।
कौटिल्य और हॉब्स की राजनीति तुलना | Kautilya Hobbes Political Comparison
प्रो. एम. पी. शर्मा ने लोक
प्रशासन की परिभाषाओं को चार श्रेणियों में विभाजित किया है। प्रथम श्रेणी में
प्रशासन की प्रकृति की व्यापक परन्तु लोक प्रशासन के विषय-क्षेत्र की सीमित
व्याख्या करने वाली परिभाषाएँ हैं; जैसे—–ह्वाइट द्वारा दी गयी परिभाषा। इस श्रेणी में आने वाले सभी विचारक यही
अनुभव करते हैं कि प्रशासन का सम्बन्ध केवल नीतियों के क्रियान्वयन से है। दूसरी
श्रेणी में वे विचारक आते हैं जिन्होंने लोक प्रशासन की प्रकृति एवं क्षेत्र दोनों
का ही संकुचित अर्थों में प्रयोग किया है। साइमन की परिभाषा इसी श्रेणी में आती
है। तीसरी श्रेणी में ऐसी परिभाषाएँ आती हैं जिन्होंने लोक प्रशासन की प्रकृति को
संकुचित अर्थों में देखा है परन्तु उसके क्षेत्र की व्यापकता को सराहा है। गुलिक
की परिभाषा इसी श्रेणी में आती है। अन्तिम श्रेणी में वे परिभाषाएँ आती हैं
जिन्होंने प्रकृति और क्षेत्र दोनों को ही विस्तृत अर्थों में स्वीकार किया है।
डिमॉक की परिभाषा इसी श्रेणी में आती है।

0 Comments