परिचय | Introduction
अर्थशास्त्र और बैंकिंग प्रणाली को समझने के लिए कुछ मूलभूत अनुपात (Ratios) बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हीं में से एक है मुद्रा–जमा अनुपात, जिसे अंग्रेज़ी में Currency Deposit Ratio (CDR) कहा जाता है।
सरल शब्दों में, जनता द्वारा अपने पास नकद (मुद्रा) के रूप में रखे गए धन और बैंकों में जमा धन के अनुपात को ही मुद्रा–जमा अनुपात कहा जाता है। यह अनुपात बताता है कि लोग बैंकिंग प्रणाली पर कितना भरोसा करते हैं और कितना धन वे नकद रखना पसंद करते हैं।
मुद्रा–जमा अनुपात की परिभाषा | Definition of Currency Deposit Ratio
मुद्रा–जमा अनुपात वह अनुपात है जिसमें यह देखा जाता है कि जनता द्वारा नकद रूप में रखी गई मुद्रा (Currency with Public) और बैंक जमा (Bank Deposits) के बीच क्या संबंध है।
सूत्र (Formula):
मुद्रा–जमा अनुपात = जनता के पास मुद्रा / बैंक जमा
मुद्रा–जमा अनुपात का अर्थ | Meaning
यदि मुद्रा–जमा अनुपात अधिक है, तो इसका अर्थ है कि लोग बैंकों की तुलना में नकद धन अधिक रखना पसंद कर रहे हैं।
यदि यह अनुपात कम है, तो यह दर्शाता है कि जनता का बैंकिंग व्यवस्था पर विश्वास अधिक है और वे अपना धन बैंकों में जमा कर रहे हैं।
मुद्रा–जमा अनुपात को प्रभावित करने वाले कारक | Factors Affecting CDR
मुद्रा–जमा अनुपात कई आर्थिक और सामाजिक कारकों पर निर्भर करता है, जैसे—
- बैंकिंग सुविधाओं की उपलब्धता – ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक कम होने से नकद रखने की प्रवृत्ति बढ़ती है।
- जनता का बैंक पर विश्वास – बैंक घोटाले या आर्थिक संकट विश्वास को कम कर सकते हैं।
- डिजिटल भुगतान प्रणाली – UPI, कार्ड और ऑनलाइन बैंकिंग बढ़ने से नकद रखने की आवश्यकता घटती है।
- आय का स्तर – अधिक आय वाले लोग आमतौर पर बैंकिंग सेवाओं का अधिक उपयोग करते हैं।
- आपातकालीन स्थिति – अनिश्चित समय में लोग नकद रखना सुरक्षित समझते हैं।
मुद्रा–जमा अनुपात का महत्व | Importance of Currency Deposit Ratio
मुद्रा–जमा अनुपात का विशेष महत्व है क्योंकि—
- यह मुद्रा आपूर्ति (Money Supply) को प्रभावित करता है।
- यह मुद्रा गुणक (Money Multiplier) को निर्धारित करने में सहायक होता है।
- केंद्रीय बैंक (RBI) को मौद्रिक नीति बनाने में मदद मिलती है।
- इससे यह आकलन किया जाता है कि अर्थव्यवस्था कितनी औपचारिक (Formal Economy) है।
भारत में मुद्रा–जमा अनुपात | Currency Deposit Ratio in India
भारत में पारंपरिक रूप से मुद्रा–जमा अनुपात अपेक्षाकृत अधिक रहा है क्योंकि बड़ी आबादी नकद लेन-देन पर निर्भर रही है।
हालांकि, डिजिटल इंडिया, जन-धन योजना, और UPI जैसी पहलों के कारण हाल के वर्षों में यह अनुपात धीरे-धीरे कम हुआ है, जो बैंकिंग प्रणाली में बढ़ते विश्वास का संकेत है।
निष्कर्ष | Conclusion
मुद्रा–जमा अनुपात किसी भी देश की बैंकिंग आदतों और आर्थिक संरचना को समझने का एक महत्वपूर्ण संकेतक है।
संक्षेप में कहा जाए तो जनता द्वारा नकद और बैंक जमा धन के अनुपात को मुद्रा–जमा अनुपात (Currency Deposit Ratio) कहा जाता है।
यह अनुपात जितना संतुलित होगा, अर्थव्यवस्था उतनी ही मजबूत और संगठित मानी जाएगी।
Related MCQ Questions (10 MCQs)
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जनता द्वारा नकद और बैंक जमा के अनुपात को क्या कहते हैं?A. ऋण–जमा अनुपातB. मुद्रा–जमा अनुपातC. तरलता अनुपातD. नकद अनुपातउत्तर: B. मुद्रा–जमा अनुपात
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Currency Deposit Ratio का संबंध किससे है?A. सरकारB. उद्योगC. जनता और बैंकD. विदेशी व्यापारउत्तर: C. जनता और बैंक
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मुद्रा–जमा अनुपात बढ़ने का क्या अर्थ है?A. बैंक जमा बढ़ रहे हैंB. नकद रखने की प्रवृत्ति बढ़ रही हैC. मुद्रा आपूर्ति घट रही हैD. कर संग्रह बढ़ रहा हैउत्तर: B. नकद रखने की प्रवृत्ति बढ़ रही है
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मुद्रा–जमा अनुपात किसे प्रभावित करता है?A. राजकोषीय नीतिB. मुद्रा गुणकC. जनगणनाD. निर्यातउत्तर: B. मुद्रा गुणक
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भारत में मुद्रा–जमा अनुपात घटने का प्रमुख कारण क्या है?A. मुद्रास्फीतिB. डिजिटल भुगतानC. जनसंख्या वृद्धिD. बेरोजगारीउत्तर: B. डिजिटल भुगतान
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मुद्रा–जमा अनुपात का उपयोग कौन करता है?A. RBIB. पंचायतC. नगर निगमD. उपभोक्ता फोरमउत्तर: A. RBI
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अधिक मुद्रा–जमा अनुपात किसका संकेत है?A. मजबूत बैंकिंगB. नकद अर्थव्यवस्थाC. उच्च निर्यातD. कम करउत्तर: B. नकद अर्थव्यवस्था
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Currency Deposit Ratio का सूत्र क्या है?A. बैंक जमा / मुद्राB. मुद्रा / बैंक जमाC. ऋण / जमाD. आय / बचतउत्तर: B. मुद्रा / बैंक जमा
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ग्रामीण क्षेत्रों में मुद्रा–जमा अनुपात सामान्यतः क्यों अधिक होता है?A. अधिक आयB. कम बैंकिंग सुविधाC. अधिक उद्योगD. अधिक करउत्तर: B. कम बैंकिंग सुविधा
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मुद्रा–जमा अनुपात किस नीति से जुड़ा है?A. विदेश नीतिB. मौद्रिक नीतिC. शिक्षा नीतिD. कृषि नीतिउत्तर: B. मौद्रिक नीति

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