
🟦 बरनार्ड और साइमन का विश्वास था कि सत्ता: एक विस्तृत अध्ययन
1. भूमिका (Introduction)
संगठन सिद्धांत के क्षेत्र में चेस्टर आई. बरनार्ड (Chester I. Barnard) और हर्बर्ट ए. साइमन (Herbert A. Simon) का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दोनों विद्वानों ने पारंपरिक सत्ता की अवधारणा को चुनौती देते हुए यह प्रतिपादित किया कि सत्ता केवल पद या अधिकार से नहीं, बल्कि अधीनस्थों की स्वीकृति से उत्पन्न होती है। उनका यह विचार प्रशासनिक व्यवहार को समझने में एक नया दृष्टिकोण प्रदान करता है।
2. पारंपरिक सत्ता की अवधारणा (Traditional View of Authority)
पारंपरिक रूप से यह माना जाता था कि सत्ता ऊपर से नीचे प्रवाहित होती है। अर्थात्, जो व्यक्ति उच्च पद पर है, उसके पास स्वतः ही आदेश देने की शक्ति होती है और अधीनस्थों का कर्तव्य होता है कि वे आदेश का पालन करें। इस दृष्टिकोण में सत्ता पद-आधारित (Position-based) मानी जाती थी।
3. बरनार्ड का सत्ता सिद्धांत (Barnard’s Theory of Authority)
बरनार्ड ने सत्ता को “Acceptance Theory of Authority” के रूप में प्रस्तुत किया। उनके अनुसार—
कोई आदेश तभी सत्ता बनता है जब अधीनस्थ उसे स्वीकार कर ले।
बरनार्ड ने आदेश की स्वीकृति के लिए चार शर्तें बताईं—
- आदेश को समझा जाना चाहिए
- वह संगठन के उद्देश्यों से मेल खाता हो
- वह अधीनस्थ के व्यक्तिगत हितों के विरुद्ध न हो
- अधीनस्थ में उसे पूरा करने की क्षमता हो
यदि इन शर्तों में से कोई भी पूरी नहीं होती, तो आदेश प्रभावी नहीं रह जाता।
4. साइमन का दृष्टिकोण (Simon’s View on Authority)
5. सत्ता का वास्तविक स्रोत (Real Source of Authority)
बरनार्ड और साइमन दोनों का विश्वास था कि सत्ता का वास्तविक स्रोत—
- अधीनस्थों की स्वीकृति
- संगठनात्मक विश्वास
- संचार की प्रभावशीलता
- नेतृत्व की वैधता
में निहित होता है, न कि केवल कानूनी या औपचारिक अधिकार में।
6. प्रशासन और प्रबंधन में महत्व (Importance in Administration)
इस सिद्धांत ने प्रशासन को अधिक मानवीय, व्यवहारिक और लोकतांत्रिक बनाया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि प्रभावी प्रशासन के लिए—
- कर्मचारियों की भागीदारी
- प्रेरणा
- विश्वास और संवाद
अत्यंत आवश्यक हैं।
7. आलोचना (Criticism)
कुछ विद्वानों का मानना है कि यह सिद्धांत सत्ता की औपचारिक भूमिका को कम करके आंकता है। कई स्थितियों में आदेश को मानना अनिवार्य होता है, चाहे स्वीकृति हो या न हो। फिर भी व्यवहारिक प्रशासन में यह सिद्धांत अत्यंत उपयोगी है।
8. निष्कर्ष (Conclusion)
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि बरनार्ड और साइमन का विश्वास था कि सत्ता ऊपर से थोपी नहीं जाती, बल्कि नीचे से स्वीकार की जाती है। यह विचार आधुनिक संगठन और प्रशासन को समझने की कुंजी है और आज भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।
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