Inflation Measurement in India / भारत में महँगाई मापने के सूचकांक
महँगाई (Inflation) को भारत में मुख्य रूप से Consumer Price Index (CPI) और Wholesale Price Index (WPI) से मापा जाता है। CPI आम जनता के उपभोग खर्च पर आधारित होता है और खुदरा महँगाई को दर्शाता है, जबकि WPI थोक स्तर पर कीमतों में बदलाव को मापता है।
महँगाई क्या है?
- महँगाई का अर्थ है समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में लगातार वृद्धि।
- जब महँगाई बढ़ती है, तो ₹100 से कम वस्तुएँ और सेवाएँ खरीदी जा सकती हैं।
महँगाई मापने के प्रमुख सूचकांक
Consumer Price Index (CPI)
- भारत में खुदरा महँगाई का मुख्य सूचकांक।
- इसे राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) जारी करता है।
- हाल ही में इसका नया आधार वर्ष 2024=100 रखा गया है।
- इसमें 12 प्रमुख श्रेणियाँ शामिल हैं: खाद्य पदार्थ, आवास, वस्त्र, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन आदि।
- CPI को RBI मौद्रिक नीति के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
Wholesale Price Index (WPI)
- थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाता है।
- इसमें प्राथमिक वस्तुएँ, ईंधन और बिजली, तथा निर्मित उत्पाद शामिल होते हैं।
- WPI को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय जारी करता है।
- यह उत्पादन और व्यापारिक लागत का संकेतक है, लेकिन आम जनता की महँगाई को सीधे नहीं दर्शाता।
GDP Deflator
- यह Nominal GDP और Real GDP का अनुपात है।
- इसमें सभी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें शामिल होती हैं।
- CPI और WPI की तुलना में यह अधिक व्यापक है, लेकिन कम बार अपडेट होता है।
Producer Price Index (PPI)
- भारत में अभी व्यापक रूप से उपयोग नहीं होता।
- यह उत्पादकों द्वारा बेची जाने वाली वस्तुओं की कीमतों को मापता है।
- भविष्य में इसे WPI का विकल्प माना जा सकता है।
RBI और महँगाई
- भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) महँगाई को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति बनाता है।
- RBI का लक्ष्य है कि CPI आधारित महँगाई 4% ± 2% के दायरे में रहे।
निष्कर्ष
- भारत में महँगाई मापने के लिए CPI और WPI सबसे प्रमुख सूचकांक हैं।
- CPI आम जनता की जेब पर असर दिखाता है, जबकि WPI व्यापार और उत्पादन लागत को दर्शाता है।
- GDP Deflator और PPI भी उपयोगी हैं, लेकिन नीति निर्माण में CPI का महत्व सबसे अधिक है।

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