दांडी मार्च और गुजरात का नवसारी
Dandi March and Gujarat’s Navsari District
साबरमती से दांडी तक ऐतिहासिक यात्रा
Historic Journey from Sabarmati to Dandi
महात्मा गांधी द्वारा आरंभ किया गया नमक सत्याग्रह (Salt March) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक आंदोलन था। यह यात्रा 12 मार्च 1930 को अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से शुरू हुई और 6 अप्रैल 1930 को समुद्र तट पर नमक बनाकर समाप्त हुई। इस ऐतिहासिक मार्च का अंतिम गंतव्य दांडी (Dandi) था, जो गुजरात के नवसारी (Navsari) जिले में स्थित है।
दांडी का चयन प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत महत्वपूर्ण था। ब्रिटिश सरकार ने नमक कानून के तहत भारतीयों को नमक बनाने और बेचने से प्रतिबंधित कर रखा था, जबकि नमक जीवन की मूल आवश्यकता था। गांधीजी ने इस अन्यायपूर्ण कानून को तोड़ने के लिए समुद्र तट तक मार्च करने का निर्णय लिया। दांडी, जो अरब सागर के किनारे स्थित एक शांत गांव था, इस आंदोलन का प्रतीक बन गया।
इतिहास की दृष्टि से यह उल्लेखनीय है कि दांडी पहले प्रशासनिक रूप से सूरत (Surat) जिले में आता था, लेकिन वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार दांडी गुजरात के नवसारी जिले में स्थित है। आज यह स्थान “दांडी कुटीर” और स्मारकों के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को संजोए हुए है।
नमक मार्च में गांधीजी के साथ प्रारंभ में 78 सत्याग्रही थे, जो रास्ते में विभिन्न गांवों से जुड़ते गए। इस मार्च ने ग्रामीण भारत को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ दिया। महिलाओं, किसानों और श्रमिकों की व्यापक भागीदारी ने इसे जनांदोलन का रूप दिया। 6 अप्रैल 1930 को गांधीजी द्वारा समुद्र से नमक उठाना ब्रिटिश सत्ता के प्रति खुली चुनौती थी।
इस आंदोलन का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसकी व्यापक चर्चा हुई और ब्रिटिश शासन की नीतियों की आलोचना हुई। नमक सत्याग्रह ने आगे चलकर सविनय अवज्ञा आंदोलन को गति दी और स्वतंत्रता की मांग को वैश्विक मंच पर मजबूती से रखा।
निष्कर्षतः, महात्मा गांधी का दांडी मार्च केवल एक पदयात्रा नहीं, बल्कि अहिंसा और सत्य की शक्ति का प्रदर्शन था। दांडी, जो आज नवसारी जिले में स्थित है, भारतीय इतिहास में स्वतंत्रता, साहस और जनशक्ति का अमर प्रतीक बन चुका है।

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