शेरशाह सूरी और हुमायूँ के बीच कन्नौज का युद्ध
The Battle of Kannauj between Sher Shah Suri and Humayun
भारतीय इतिहास में कन्नौज का युद्ध एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। यह युद्ध 17 मई 1540 ई. को मुगल शासक हुमायूँ और अफगान नेता शेरशाह सूरी के बीच लड़ा गया था। इस युद्ध ने उत्तर भारत की राजनीति की दिशा बदल दी और मुगल साम्राज्य को अस्थायी रूप से समाप्त कर दिया।
बाबर की मृत्यु के बाद उसका पुत्र हुमायूँ मुगल सिंहासन पर बैठा, लेकिन वह एक कुशल प्रशासक और दृढ़ शासक सिद्ध नहीं हो सका। दूसरी ओर, शेरशाह सूरी एक अत्यंत प्रतिभाशाली, रणनीतिक और दूरदर्शी नेता था। उसने बिहार और बंगाल में अपनी शक्ति मजबूत कर ली थी और धीरे-धीरे मुगलों के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया।
कन्नौज के युद्ध से पहले चौसा का युद्ध (1539 ई.) हुआ, जिसमें शेरशाह ने हुमायूँ को पराजित किया था। इसके बावजूद हुमायूँ ने अपनी स्थिति सुधारने के लिए प्रयास किए, लेकिन उसकी सेना में अनुशासन और नेतृत्व का अभाव था। 1540 ई. में दोनों सेनाएँ कन्नौज (जिसे बिलग्राम का युद्ध भी कहा जाता है) के मैदान में आमने-सामने आईं।
इस युद्ध में शेरशाह सूरी ने अत्यंत कुशल युद्धनीति अपनाई। उसने अपनी सेना को संगठित रखा और आधुनिक हथियारों तथा घुड़सवार सेना का प्रभावी उपयोग किया। इसके विपरीत, हुमायूँ की सेना में आपसी मतभेद, कमजोर रणनीति और अनुभवहीन नेतृत्व स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। परिणामस्वरूप हुमायूँ को करारी हार का सामना करना पड़ा।
कन्नौज के युद्ध में हार के बाद हुमायूँ को भारत छोड़कर ईरान (फारस) जाना पड़ा। इस पराजय के साथ ही उत्तर भारत में मुगल शासन का अंत हो गया और शेरशाह सूरी ने सूरी वंश की स्थापना की। शेरशाह सूरी ने अपने अल्पकालिक शासन (1540–1545 ई.) में प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य सुधारों के माध्यम से एक सशक्त शासन व्यवस्था स्थापित की।
शेरशाह द्वारा बनाए गए सड़क मार्ग (ग्रैंड ट्रंक रोड), राजस्व व्यवस्था, न्याय प्रणाली और प्रशासनिक सुधारों को बाद में अकबर ने भी अपनाया। इस प्रकार, कन्नौज का युद्ध केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं था, बल्कि इसने भारतीय प्रशासन के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
निष्कर्षतः कहा जा सकता है कि 17 मई 1540 ई. को लड़ा गया कन्नौज का युद्ध भारतीय इतिहास का एक निर्णायक मोड़ था। इस युद्ध ने शेरशाह सूरी को भारत का शासक बनाया और हुमायूँ को निर्वासन में भेज दिया। यह युद्ध शक्ति, रणनीति और नेतृत्व के महत्व को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

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